कविता

कभी - कभी हमें कितना कुछ कहना होता है, 
लेकिन सुनने वाला कोई नहीं होता है.
पास में हर कोई होता है, 
लेकिन समझने वाला कोई शख्स नहीं होता
चकाचौंध भरी दुनिया में
दिल का आशिया अंधेरा सा दिखता है 
वक्त बिता कर पता चला 
लोग तो बहुत है
लेकिन कोई समझने वाला नहीं होता

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