" बुल्लीबाई ऐप"

अभी एक खबर काफी सुर्खियों में चल रही है "बुली बाई ऐप ".
अगर आप सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं तो आपने भी जरूर पढ़ा या सुना होगा . प्रश्न यह है कि   "बुल्ली बाई  ऐप "क्या है ? आपकी जानकारी के लिए बता दे कि ,इस ऐप पर लोगों को मुसलमान औरतों की खरीदारी के लिए आमंत्रित किया जाता है.कहीं - कही आपको यह भी पढ़ने को मिलेगा कि वह हिंदू मुसलमान दोनों धर्मों की औरतों के लिए था. आपको बता दें कि जिसने यह ऐप बनाया था उनकी उम्र महज 18 से 21 साल के बीच  है. यहाँ आप थोड़ा आश्चर्य होंगे इतनी कम उम्र में इतनी घटिया काम . जहां उस उम्र के बच्चे को आईआईटी मेडिकल में अपना दिमाग लगाना  चाहिए वहाँ ये घिनौनी कामों में लगाये हैं. 18 साल की एक लड़की स्वेता सिंह जो उतराखंड  इंजीनियरिंग स्टूडेंट है  , वही 21 साल का विशाल झा भी इंजिनियरिंग स्टूडेंट है, युवा नीरज भी महज 21 साल  B. Tech के स्टूडेंट है.
युवा नीरज के बारे में कहा जा रहा है कि वह धर्म विशेष की उन औरतों से बहुत नाराज था जो सोशल मीडिया पर अपनी मजबूरी पहचान के साथ प्रतिक्रिया देती हैं.वही ऐसी औरतों से बदला लेने का उसने आसान तरीका अपनाया औरतों की ऑनलाइन नीलामी करवा दी जाए. 
एक कहावत है जो हमारे देश के बड़े बुड्ढों द्वारा कही  जाती हैं  - औरतें  सबके घर में होती है अगर अपने घर की औरतों का सम्मान चाहिए तो दूसरे के घरों की औरतों का सम्मान करना चाहिए.
कुछ लोगों द्वारा यह कहा जा रहा है कि इस पर कोई नीलामी नहीं की गई है यह तो मात्र मनोरंजन के लिए था . औरतें की नीलामी करके,उनका सरेआम अपमान करके आपका  कौन सा मनोरंजन हो रहा था. तकनीक ने क्या आपको यही सिखाया है? 

हमारे सामने अभी एक सवाल खड़ा हो उठता है कि  आखिर ये इस जाल में फंसे कैसे? किसी ने उकसाया तो नहीं ?हमारे घरों में तो ऐसे संस्कार बिल्कुल नहीं दिए जाते हैं ,फिर 18 साल की एक लड़की ने जो इस दौर की लड़की है  उसने यह कैसे सीख लिया.

इस लड़की के बारे में कहा जाता है कि हाल ही में इसके माता पिता का निधन हुआ है .
तो क्या अपने दुख को दूर करने का यही एक तरीका था? एक लड़की होते हुए भी दूसरी लड़की की नीलामी के बारे में सोचा जाए? आजकल हमारे समाज में एक फैशन सी बन गई है आपने भी यह जरूर नोटिस किया होगा कम उम्र के लड़के लड़कियां सिगरेट के शौकीन हो रहे हैं , क्युं क्योंकि  डिप्रेशन में है.  क्या उनकी डिप्रेशन सिगरेट पीने से चली जाती है?   मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने इस लड़की के साथ नरमी से पेश आने की गुजारिश की है .
हमारे देश में यह कोई पहली घटना नहीं है ऐसे कई सारी घटनाएँ पहले भी हो चुकी है .आपको बता दें कि बुल्ली बाई ऐप आने से पहले  SULLIDEALS ऐप आई थी.यह भी  मुस्लिम औरतों पर  attack करती थी.इसके अलावा टेलीग्राम की किक मैसेंजर रेडिड डिस्कोट पर कई ऐसे चैनल है जो इसी तरह के काम करते हैं. 

धर्म को लेकर लोगों के अंदर जो नफरत है ,वह इस कदर बढ़ गई है कि हमें रोज न जाने कितने केस देखने को मिलते हैं  .जैसे अंकित सक्सेना की मर्डर क्योंकि वह मुस्लिम औरत से शादी करना चाह रहे थे , चंदन गुप्ता का मर्डर जो कमलेश तिवारी का मर्डर ये सारी हत्या धर्म को लेकर हुए हैं . 

बुल्ली बाईं  केस को लेकर जावेद अख्तर ने अपने ट्विटर पर लिखा है, कि बुल्ली बाईं केस में जो 18 साल की लड़की दोषी है.उसने अपने दोनों पेरेंट्स को खो दिए हैं कैंसर पर कोरोना से  उन्हें माफ कर देना चाहिए.
 जर्नलिस्ट रोहनी सिंह का कहना है कि, अगर उसकी माता - पिता का देंहात कोरोना से हुआ है, तो उन्हें अपनी आवाज सरकार के खिलाफ उठानी चाहिए. लेकिन आप एक लड़की होकर दूसरी औरत की निलामी करती है यह कैसे हो सकता है.
हमारे यहाँ सूचना का इतना व्यापक तंत्र है. औरतों के सम्मान की बड़ी - बड़ी बातें हैं लेकिन यह तंत्र क्यों नहीं सिखाता कि धर्म - जाति के बहाने किसी की बेइज्जती करके मनोरंजन करना अपराध है.
अफसोस, आज के इस दौर में हमारे कुछ युवा इंसानियत भूलते जा रहे हैं.

Comments

Popular posts from this blog

चिंता महिलाओं के स्वास्थ्य की

प्रताड़ना झेलने को विवश आधी महिलाएँ

लैगिक असमानता में उठते सवाल