लड़की
तू लड़की है, तुझे चार दिवारी में ही रहना होगा
तूक्षे थोड़ी छुट क्या दे रखी,
तेरे तो पंख ही लग गये..
लेकिन तू भूल मत इस पंख की
डोरी न हमारे ही हाथों में है,
कभी भी कट सकती है ....
ये मान - मर्यादा की जितनी भी
बेडिया है, तू इसकी लाज रख ..
थोड़ी आजादी क्या दे दी,
तूने तो अपने जिंदगी की फैसले लेने लग गइ..
लेकिन तू भूल मत तेरे इस आजादी के
डोर भी मेरे हाथों में है....
तू लड़की है..
तू बस संस्कारी ही अच्छी लगती है..
तू बस मान - मर्यादा की लाज रख...
सुन तू वही कर जो मैं बोलू
ज्यादा बोली न,
तो तेरे इस पंख को भी कतर डालेंगे...
तू लड़की है...
तू संस्कारी और मान - मर्यादा में ही
लिपटी ज्यादा अच्छी लगती है...
@ ऐश्वर्या @
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