दुश्मन ड्रोन

पाकिस्तान को देखकर ऐसा लग रहा है ,जैसे मानो उसके हाथ नई खिलौना लग गया है.जैसे कि ड्रोन मनचाहा इस्तेमाल कर रहे हैं.वह उसका लेकिन यह मामूली बात नहीं .वह जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रों में हमला कर रहा है.इन दिनों व जम्मू एयर बेस क्षेत्र में हमला किया है.सुरक्षा के संबंध में एक प्रचलित मुहावरा है, संसाधन जितनी उच्च तकनीक से युक्त होंगे सुरक्षा उतनी ही पुख्ता होगी.यह ड्रोन ने सरकार तथा सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है ,की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए अब अत्यधिक उन्नत तकनीक की  जरूरी नहीं रह गई है .आतंकवादियों ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए ऊंची लागत के इंतजामों की जरूरत नहीं है.
गौरतलब है कि हमारे देश में ड्रोन को पहली बार  हथियार बनाया गया है.इसने कई सेना कर्मी को घायल कर दिया है.प्रश्न यह है कि इस खबर को हवा में उड़ा देना चाहिए? या पाकिस्तान हमारे धैर्य की नई परीक्षा नहीं ले रहा है ?
अगर आतंकी ड्रोन का इस्तेमाल कर पाने में कामयाब हो रहे हैं ,तो यह उनके हाथों में परमाणु बम पर जाने से कम नहीं है .कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के लिए कुछ  असंभव नहीं है . वह डर्टी बम का भी इस्तेमाल कर सकते हैं ,जो कि हमारे देश और पूरी दुनिया को खतरे में डाल सकते हैं .
खैर डर्टी बम बनाना इतना आसान  काम भीनहीं .लेकिन ड्रोन के मामले में कहना गलत नहीं है कि बाजी हमारे हाथ से निकल चुकी है.
पहले कोई भी जंग मनोवैज्ञानिक और कूटनीति स्तर पर लड़ी जाती थी.
ऐसा पहली बार है जब पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में ड्रोन देखा गया.यह कूटनीतिक सभ्यता के विरुद्ध है.

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