सुशासन की असल परीक्षा
सुशासन की अवधारणा की रूपरेखा महात्मा गान्धी के नेतृत्व में लड़े गए स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान तैयार की गई थी. शोषणकारी, साम्राज्यवादी आधुनिकता उपनिवेशवादी शक्तियों से भारत के लोगों का सामना होने से उन्हें शासन के एक बेहतर स्वरूप को तलाशने का अवसर मिला था.
आधुनिक भारत में यह से सुशासन की एक पटकथा सामने आई.
गौरतलब है कि कोरोना के कारण पूर्णबंदी के चलते अर्थव्यवस्था और रोजगार पर सबसे ज्यादा गाज गिरी. इसका प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा से लेकर तमाम बुनियादी विकास पर पड़ा. जिससे हमारा देश पीछे की तरफ जाता नजर आ रहा है.
गौरतलब है सुशासन शांति और खुशियों को आगे बढ़ाता है, लेकिन इन दिनों वह खुद जकड़ा हुआ है कोरोना के कारण.
देश में कोरोना की दूसरी लरह ने बड़े तेज और व्यापक रूप से फैले. जिससे सुशासन के भी हाथ पैर फुलने लगे थे. प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में लोगों की मौत होने लगी थी क्योंकि वह पहले लहर के तुलना में ज्यादा घातक और असरदार था.
महामारी ने एक बार फिर से जनजीवन को अस्त - व्यस्त कर दिया. करोड़ों की जनसंख्या में लोग गरीबी के कारण सड़को पर आ गयें. इस बार भी लोग गरीबी की मार सह रहे हैं.
अजीम प्रेमजी की एक रिपोर्ट यह बताती है कि कोरोना की सबसे बड़ी मार गरीब लोग पर पड़ी है.
गौरतलब है कि पीछले साल देशव्यापी पूणबंदी के कारण 12 करोड़ से अधिक लोग की नौकरियां चली गई थी. तथा 20 करोड़ लोगों का काम - धंधा बैठ गया था.
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