हरित ऊर्जा

 हरित ऊर्जा ऐसा स्थायी स्त्रोत है जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक नहीं है. 
हमारे आस - पास बहुत ऐसे प्राकृतिक चीज है जिससे प्रदूषण को कम किया जा सकता है. जैसे अगर हम सोलर ऊर्जा की बात करें तो हम सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को इकट्ठा कर बिजली के रूप में कर सकते हैं. जिससे हमारे प्राकृतिक को भी किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा तथा प्रदूषण होने से भी हम बचा सकते हैं.धरती के खुले हवादार स्थानों पर पवन चक्कियों द्वारा हवा के माध्यम से उत्पन्न की जाने वाली पवन उर्जा भी हरित ऊर्जा का अच्छा विकल्प बनकर उभर रही है। इससे भी बिजली बनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि दुनिया में सकल पवन ऊर्जा के उपयोग में चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत का चौथा स्थान है। भारत की पवन ऊर्जा के उत्पादन में कुल वैश्विक भागीदारी 5.8 प्रतिशत है। भारत सरकार ने 1998 में चेन्नई में एक स्वायत्त अनुसंधान और विकास संस्थान पवन ऊर्जा प्रौद्योगिकी केन्द्र (सी-वैट) की स्थापना की थी। जल सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है और जल ऊर्जा ज्वार-भाटा, तरंगों, जलताप और जलविद्युत के रूप में मिलती है। जल ऊर्जा भी हरित ऊर्जा का एक प्रकार है। 
जल ऊर्जा अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा पैदा करने के लिये उच्च वर्षा के स्तर पर निर्भर करती है। जल चक्र से उत्पन्न बिजली को जलविद्युत कहते हैं। विकसित देशों के विकास में जलविद्युत का योगदान कुल आवश्यकता का 50 प्रतिशत से अधिक रहता है जबकि भारत में यह 15 प्रतिशत के लगभग है। विश्व के सर्वाधिक जलविद्युत उत्पादक देशों में चीन और ब्राजील सबसे ऊपर आते हैं। 
भू-तापीय ऊर्जा – पृथ्वी के गर्भ में उपस्थित खनिजों के रेडियोधर्मी क्षय और भूसतह द्वारा अवशोषित सौर ऊर्जा के कारण भारी मात्रा में तापीय ऊर्जा बनती है, जिसे भूतापीय ऊर्जा कहते हैं। इस भूतापीय ऊर्जा में मनुष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की असीम क्षमता है लेकिन इसके दोहन के उपाय अपेक्षाकृत अधिक महँगे हैं

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