गुत्थी परीक्षा की

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं रद्द करने का फैसला हालात को देखते हुए तो उचित ही है. क्योंकि कोरोना जिस पडाव में है उससे देखते हुए नजर अंदाज नहीं किया जा सकता. शायद इस खबर से अभिभावक और विधाथियो ं  को थोड़ी राहत तो जरूर मिली होगी. क्योंकि यह उनके लिए कोई जोखिम से कम नहीं.
 गौरतलब है कि देश महामारी की दूसरी लहर की मार क्षेल रहा है. ज्यादातर राज्यों में हालात अभी भी हालात बेकाबू है. 
  बारहवीं परीक्षा को रद्द करने का फैसला इस समय उपलब्ध सभी विकल्पों में सबसे अच्छा माना जाएगा.  15 लाख परीक्षार्थी हर वर्ष इस परीक्षा में शामिल होते हैं. 
 हां, बच्चों को यह चिंता जरूर होगी कि अगर वह परंपरागत परीक्षा नहीं देगें तो उनके भविष्य के साथ क्या होगा. वह किस प्रकार किसी उच्च संस्था में अपना नामांकन ले सकेंगे. यह सोचना उनके लिए जायज भी है. क्योंकि यह उनके भविष्य का सवाल है. खैर, सरकार भी अभी तक कोई उपाय नहीं सोची है.
 पिछले कुछ महीनों से देश कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है. जिससे प्रत्येक लोग वाकिफ है. 
जहाँ प्रत्येक लोग अपने घर में बंद हैं. तथा सबके मन में अभी कई सारे नाकारात्मक सवाल चल रहें हैं. 
 सवाल यह है कि अब, बच्चों का भविष्य क्या है?  तथा इन परिक्षाओं का विकल्प क्या होगा. 
 बोर्ड की परिक्षाओं से नौजवानों का भविष्य काफी हद तक तय होता है . 
  
 

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