नाटों
इन दिनों चीन अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए यूरोपीय संघ का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है .अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन का कहना है कि चीन यूरोप को सारे तरफ से संकट में डाल सकती है ,जैसे आक्रमक ,असंतुलित और अस्थिरता .
आपको बता दें कि नाटो का पूरा नाम उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन है.यह यूरोप और उत्तरी अमेरिका देशों का गठबंधन है.जो कि दोनों महाद्वीपों के बीच रक्षा और सुरक्षा पर परामर्श और सहयोग तथा आपसी अंतरराष्ट्रीय संगठन प्रबंधन एक साथ संचालन के लिए काम करता है.1949 में अमेरिका और यूरोप की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए स्थापित सैन्य संगठन का प्राथमिक लक्ष्य उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में साम्यवाद को रोकना शांति व्यवस्था बनाए रखना था.
सामूहिक सुरक्षा के सबसे बड़े और शक्तिशाली क्षेत्रीय संगठन नाटो के हालिया शिखर सम्मेलन में चीन का सबसे बड़ा जोखिम मानते हुए नाटो के महासचिव स्टोल्टेनबर्ग ने सदस्य देशों से चीन को काबू करने की नीति पर काम करने को कहा है .
आपको बता दें कि इससे पहले सहयोगी और सदस्य चीन को देखना नहीं चाहते थे .तथा उससे प्रतिद्वंद्वी जैसा व्यवहार करते थे.परंतु इनके बीच आर्थिक रिश्ते को भी लेकर उत्साहित रहते थे.
गौरतलब है कि चीन और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं.आपको बता दें कि इन दिनों चीन अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए यूरोपीय संघ का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है .करोना महामारी के कारण यूरोप के प्रमुख साझेदार देशों का व्यापार घट गया ,लेकिन चीन पर इसका कोई ज्यादा असर देखने को नहीं मिला.पिछले साल प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में चीन ही एकमात्र देश था, जहाँ आर्थिक विकास देखा गया.इतना ही नहीं यूरोपीय संघ और चीन अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश में लगे हुए हैं .अब नाटो और समूह -7 का चीन को लेकर जो बेहद अप्रत्याशित रूप सामने आया है, उससे लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रीय शक्तिशाली देश का सहारा देकर यूरोप के देशों के को लामबंद करने में सफल हो गए हैं .यह चीन पर अमेरिका की बड़ी कूटनीति विजय मानी जाएगी.
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