लड़की

लड़की होना कोई मामूली बात नहीं
माँ के गर्भ से निकलते ही
अरे! बेटी हुई है... 
ये सुनते ही न जाने कितनी बड़ी सदमा लगती है.
थोड़ा बडे़ क्या हुए.. 
मानो ताने के तो अंबार लग जाते हैं.
अरे! तू लड़की है न, घर की चार दिवारी में रहा कर
लडकिया चौखट के बाहरी अच्छी नहीं लगती
तू न पर्दे के भीतर रहा कर
तू लड़की है न कम बोला कर
लडकिया ज्यादा नहीं बोलती..
ये छोटे - छोटे कपड़े मत पहना कर
तेरे माँ - बाप ने कोई संस्कार नहीं दिये है
यहाँ आपके परवरिश पे सवाल खड़े होने में
क्षणिक भर समय नहीं लगते.. 


ये बताने वाले हमारे समाज होते हैं


Comments

Popular posts from this blog

चिंता महिलाओं के स्वास्थ्य की

प्रताड़ना झेलने को विवश आधी महिलाएँ

लैगिक असमानता में उठते सवाल