टीकों में भी फर्जीवाड़ा

टीकाकरण और करोना जांच में फर्जीवाड़े की घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है l ह बात सुनने में कुछ अटपटा नहीं लगेंगे, क्योंकि यहां के लोग यह सब करते आए हैं ,कैसे इसमें अलग से ज्यादा पैसा कमा लिया जाए l यहां भी उन्हें मनुष्य के स्वास्थ्य की चिंता से ज्यादा पैसे कमाने की पड़ी है l
   विडंबना है कि सरकार  के इतने चाक-चौबंद होने के बावजूद भी लोग खिलवाड़ करने में कामयाब हो जा रहे हैं l हलांकि देखे तो फर्जी टीकाकरण की घटनाएं देश के अन्य इलाकों से भी आ रही है l
गौरतलब है कि बड़े-बड़े महानगर के इतने मुस्तैद होने के बावजूद भी इनमें यह फर्जीवाड़ा टीकाकरण कैसे हो जा रहा हैl 
यह भी प्रश्न चिंतनीय योग्य है  ,अगर बड़े बड़े महानगर के ऐसे हाल हो रहे हैं, तो हम जैसे छोटे शहरों का क्या  होगा? 
सवाल यह भी है कि आखिर फर्जी टीकाकरण शिविर चलते कैसे रहे? टीकाकरण की जिम्मा संभालने वाले आखिर करते क्या है? ऐसे में हम लोगों को सतर्क होना पड़ेगा.
गौरतलब है कि टीकाकरण के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार की तरफ से बाकायदा एक व्यवस्था की गई है l सरकार द्वारा टीका लगवाने से पहले  कोविन ऐप के जरिए पंजीकरण कराना पड़ता है l सके बाद ही टीका लगाने का दिन और समय  आता हैlnसाथ ही एक ओटीपी नंबर मिलने की व्यवस्था है इस ओटीपी नंबर बताने के बाद ही टीकाकरण का प्रमाण पत्र मिल पाता हैl परन्तु फर्जीवाड़े ने इस पूरी प्रक्रिया को गलत साबित कर दिया l
अगर बिहार राज्य की बात करें तो वहां की मुख्यमंत्री ने आधार कार्ड अनिवार्य किया है इसमें कोई संदेह नहीं है अगर फर्जीवाड़ा का बड़ा कारण टीकों की पर्याप्त कमी को माना जाये lअभी पहले डोज लिए हुए व्यक्ति के दूसरी डोज को बढा दिया गया है , जिसका बडा़ कारण है, टीकों की कमी है.महाराष्ट्र सरकार ने घर - घर जाकर टीके लगाने जैसे कदम उठाने की तैयारी में है .बुढे़ लोगों को कोई दिक्कत ना हो तो तथा वह हॉस्पिटल की चक्कर ना काटे .
लेकिन अगर महामारी से निपटने की जगह लोग इसमें फर्जीवाड़ा काम करेंगे तो करोना स से हम कैसे निपटेंगे.

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