हाँ मैं बदल गई
हाँ, मैं बदल गई...
बदलना तो नहीं चाहती
परन्तु वक्त और लोगों ने बदल दिया
अब मुझे किसी से कोई उम्मीद नहीं रहती
क्योंकि बोलते है न expectations is wrost
उसे मैंने बहुत करीब से देखा है..
विश्वास और यकीन जैसे शब्द पे तो
अब हंसी आती है
बेचारे इनके क्या गलती थी
इनके भी मजाक उड़ गये
अब लोगों से डर लगने लगा
कब इन जज्बातों को फिर से
धोखा मिल जाये...
अब इन्हीं अपनी क्षुठी मुस्कान में
खुश रहने की वजह खोज लिया करती हूँ
क्योंकि जल्दी कोई वजह नहीं मिला करती
लोगों द्वारा लगाये गये हर प्रकार की गलतियां
स्वीकार कर लेती हूँ..
क्योंकि हर जगह सफाई देना जरूरी
नहीं समक्षती....
@ ऐश्वर्या @
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