सतर्कता की दरकार

दूसरी लहर के निरस्त होते ही सारे राज्यों की सरकार ने अपने - अपने कुछ नियमों - कानूनों के साथ सब कुछ खोलने लगी है. लेकिन इस बीच सरकार को यह ध्यान देना होगा कोई स्थल पर ज्यादा भीड़ न हो. सभी चीजों को चरणबद्ध तरीके से खोलना होगा ताकि धीरे - धीरे गतिविधिया सामान्य बनाने में मदद मिल सकें. 
  अगर हम  दिल्ली की बात करें तो वहाँ दिल्ली सरकार ने  प्रमुख बाजारों को खोलने की  इज्जाजत पहले ही दे दी थी. अब तो वहाँ सप्ताहिक बाजार भी लगने लगे हैं. इसके अलावा बार, रेस्टोरेंट तथा उद्यान भी खुल गये हैं. लेकिन अभी भी लोग अपनी इस गलितयों को दोहराना नहीं छोड़ रहे. बार , रेस्टोरेंट  में लोग बीना मास्क के ही दिख रहें हैं. तथा दो गज की दूरी का भी लोग पालन नहीं कर रहे हैं.
 दिल्ली के अलावा  अगर और राज्यों की बात करें तो  तो सभी राज्यों ने अपनी कड़ी पाबंदियां धीरे - धीरे हटा रही है.  उत्तर प्रदेश, राज्यस्थान, तेलंगाना  जैसे राज्यों ने भी अपने कड़े नियम निदेश को हटा रही है. तेलंगाना सरकार ने तो  अपने शिक्षण संस्थान खोलने का फैसला किया है. कई ऐसे राज्यों अभी शिक्षण संस्थान खोलने में हिचकिचा रहे हैं. इसमें कोई शक नहीं शिक्षण संस्थान खोलते ही फिर बच्चों के भीड़ लगने शुरू हो जाएंगे. लेकिन सरकार को अब पूरे नियमों के साथ शिक्षण संस्थान खोलना चाहिए. क्योंकि जिस बच्चे का समय अभी कोपी - कलम से लिखने - पढने का है. उस समय वह आंनलाइन पढाई कर रहे हैं. यूँ कहें तो जितनी उनकी पढाई नहीं होती होगी उससे ज्यादा वो गेम्स खेलने में ही लगा देते होगें.
 अभी छोटे - बड़े कारबारों  को खोलने की जरूरत है. ताकि लोग अपनी जीविकोपार्जन तो चला सकें.
  अगर ऐसे ही आकड़ों में कमी आती रही तो जिंदगी फिर से नई कवायद की और अपनी रूख मोड़ देगी. लेकिन इसके लिए उसे पूरी सतर्कता तथा कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा.
   विडम्बना है कि, दूसरी लहर एक बार हमारे बीच आने वाली है. विशेषज्ञों का कहना है कि तीसरी लहर सिंतबर - अक्टूबर के मध्य आयेगी. वायरस कब आ जाये ये भी कोई ठीक नहीं. बस हमें कोरोना गाइडलाइन को मानना होगा.

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