चुनौती बनते साइबर हमले

  जब से कोरोना महामारी ने दुनिया को  गिरफ्त में किया है, तब से अंधेरे कमरों में कंप्यूटरों के पीछे बैठे शातिर अपराधियों की मानों लांटरी  ही लग गई है. तथा कुछ लोग अपने  दिमाग का गलत इस्तेमाल कर साइबर अपराधों में लगा रहे हैं. क्योंकि आज कल लोग मोबाईल, कंप्यूटर पर अपना ज्यादा वक्त जाया कर रहे हैं. 
 साइबर अपराधियों ने हर क्षेत्र में अपना दिमाग लगा कर अपराधिक काम किये है. बैकिंग हो या बिजली आपूर्ति, आम लोग हो या सरकारी एंजेसिया - साइबर अपराधियों ने सेंध लगाने के मामले में किसी को नहीं बख्शा है.
  इस सेंधमारी को रोकने के लिए भरसक प्रयास किया गया है लेकिन साइबर हमलावरों ने बार- बार यह साबित करने की कोशिश की है कि अगर सेंधमारी रोकने के इंतजाम डाल - डाल है, तो उनमें घुसपैठ करने वालों के इरादे पात _  पात है. 
हालिया घटनाओं के फेहरिस्त में वैश्विक उडान कंपनियों पर हुए साइबर हमलों की बात भी सामने आई है उनमें एअर इंडिया से लेकर मलेशिया, एअरलाइंस, फिनएअर, सिंगापुर और कैथे पैसिफिक जैसी कंपनियां शामिल हैं . 
  साइबर अपराधि हवाई यात्रियों के पासपोर्ट, केडिट कार्ड, व्यक्तिगत जानकारियां जैसे - ग्राहकों के नाम, जन्मतिथि, फोन नंबर तक उड़ा ले रहे हैं. 
 इन्हें किसी से किसी प्रकार का भय नहीं है, इसलिए ये इतने बेखौफ हैं कि इन्हें अमेरिका जैसी महाशक्ति से भी डर नहीं लगता. हाल ही में वे अमेरिका कु सबसे बड़ी इधन पाईप लाइन पर बडा़ हमला किया है जिसके कारण वहाँ आपातकाल का एलान किया गया. 
 अमेरिका कंपनी केरिजोन बिजनेस ने विश्लेषण के आधार पर दुनिया भर में डाटा उल्लघंन यानि डिजिटल सेंधमारी के सवा 5 हाजार मामले दर्ज किए गए जो पिछले साल के तुलना में कहीं ज्यादा है.
  साइबर क्राइम के  कारण कितने गरीबों के रखे पैसे उड़ जा रहे हैं. 

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