शराब की बिक्री से किसका भला होगा
जो सरकार कोरोना महामारी के दौरान लोगों तक दवा नहीं पहुंचा पायी. जिसकी जरूरत प्राथमिकता थी, उसको छोड़ सरकार दवा के जगह शराब बांटना सही समक्षा. क्योंकि उससे उसकी फायदा जो हो रही थी. दिल्ली सरकार का इसके पीछे का तर्क है कि इससे लोग महामारी के दौरान शराब की दुकानों पर लाइन लगाने से बच जाएँगे, शराब की बिक्री बढ़ने से सरकार की आमदनी बढेगी, उससे दिल्ली वासियों की सजा की जाएंगी.
क्या हमारी सरकार की परिस्थिति इतनी खराब हो गई है, कि जिसकी सेवन करने से लोगों की जागरूक करना चाहिए वही आज सरकार उनकी पूरी मदद कर रही है.. अपनी स्थिति को ठीक करने के लिए.
नई आबकारी नीति में शराब की बिक्री बढाने के लिए 838 पुरानी दुकानों को बंद करके नई दुकानें खोली जा रही है. तथा अब इनमें 25 साल से घटा कर 21 साल तय की है.
पहले शहर में जगह - जगह महात्मा गाँधी के होडिंगस लगाए जाते थे, जिन पर गांधी जी का कथन, " शराब शरीर और आत्मा दोनों का नाश करती है, " लिखा होता था.
आज उनकी बातों का अनदेखा करते हुए लोग नशा कर रहे हैं. अब तो दिल्ली में सरकार होम डिलीवरी हो गई है यानि कि अब लोगों को लाइन में लग कर परेशान नहीं होना होगा. घर पर ही ये सुविधा उन्हें मिल जाएगी.
एक तरफ लोग कोरोना जैसी महामारी से परेशान है, जहाँ लोगों के घरों में पूंजी नहीं वहाँ लोग कर्ज लेकर शराब जैसी पेय - पदार्थ का सेवन करने से पीछे नहीं हट रहे हैं.
दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार राजनीति के लिए क्या - क्या पैतरे बांध रही है यह कहना मुश्किल नहीं.
इससे अच्छा तो, कहीं बेहतर पिछड़ा राज्य बिहार है. जो शराब पर पाबंदियां तो लगाई है.
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