जिंदगी

कई सारे अनसुलझे सवाल का नाम है जिंदगी 
 जाहाँ हम कई सारे प्रश्नों में घिरे हैं 
जाहाँ हम अपने आप में इस कदर डूबे रहते हैं
 कि सुर्योदय  से  सुर्यास्त कब हो जाते हम इसका अनुगमन ही नहीं कर पाते 
 शायद इसी को लोग जिंदगी बोलते है 
 काश, ये जिंदगी न खुली किताब कि तरह होती 
 जहाँ हम एक दूसरे को पढ़ सकते 
 काश, ये जिंदगी खाली पन्नों की तरह होती 
 जिसे पसंद न  आने पर हम इसे कचड़े में डाल सकते.
काश ये जिंदगी अनसुलझे पहेलियों सी न होती
 जिससे हम सुलक्षाने  में वक्त जाया न करते.
      $ Aishwarya $

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