श्रम बाजार में महिलाएं

 श्रम बाजार में महिलाओं की उपस्थिति अनिवार्य रूप से देखी जा रही है. तथा बडे़ पैमाने पर लोग सहभागिता भी ले रहे हैं. पिछले साल कोरोना काल में महिलायें मास्क बना कर बडे़ पैमाने पर कारोबार की थी तथा आत्मनिर्भर भारत के बढ़ते कदम में भाग ली थी. आज कल महिलायें पुरूषों के अपेक्षा ज्यादा कारोबार को संभाल रही है. 
   महिलायें देश की रीढ़ है. जीतना पुरूषों कु जरूरत है इस समाज में उतना ही महिलायों की. प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व यानि अठारहवीं शताब्दी तक महिलायें केवल वस्त्र उद्योग से जुड़े व्यवसाय में संग्लन थी. जहाँ उन्हें कम वेतन तथा जोखिम भरे हालात में काम करना पड़ता था . 
 जिन महिलाओं को यह पाठ पढ़ाया  जाता था  कि उनकी जगह घर में है. वहाँ आज हर जगह प्रत्येक क्षेत्र में महिलायें सामने आ रही है. अस्पताल, बड़े - बड़े उद्योग, कल - कारखानों में महिलायें काम कर रही है.
 

Comments

Popular posts from this blog

धरती बचाने की चुनौती

A responsible father

लापरवाही