चिंता महिलाओं के स्वास्थ्य की
देश के कुल कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी की बात हर साल आती हैं. कितनी महिलायें किस क्षेत्र में अपना बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं, सबकुछ सामने आती है लेकिन इनके स्वास्थ्य के बारे में कोई रिपोर्टर नहीं आती, और न उसपर कोई ज्यादा चर्चा होती है.एक सवे्क्षण के मुताबिक हमारे देश में महिलाओं की संख्या पुरूषों से ज्यादा होने की संकेत बताई जा रही हैं . ऐसे में देश की आबादी के सबसे बडे़ तबके के रूप में महिलाओं के स्वास्थ्य पर नजर जरूर जानी चाहिए. यह तथ्य थोड़ा चौकानें वाला जरूर है कि हर दूसरी महिला खून की कमी से पीड़ित है और हर तीसरी महिला का ' बाडी मास इंडेक्स' से कम है. कुल आबादी की एक चौथाई महिलाएँ कुपोषण का शिकार हैं. तमाम वादों और उसके दावों के बावजूद आगर ये हाल है, तो हमें सर्तक हो जाना चाहिए. कई सर्वेक्षण में यह उजागर है कि महिलाओं को पुरूषों की तुलना में कम पोषण मिलता है. यूँ बोले, तो हमारा समाज आज भी पुरूष प्रधान है. आज भी पुरूष को ज्यादा पोषण दिया जाता है. हमारे गाँव में यह प्रचलन है, कि पुरूष को काम करना होता है, तो उन्हें ज्यादा पोषण की जरूरत है, महिला तो चारदीवारी के अंदर रह...
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