लैंगिक विषमता के समांतर सवाल

 विश्व आर्थिक मंच  ने पंद्रहवी लैंगिक असमानता सुचकांक 2021 की रिपोर्ट जारी की है. जिसमें अभी भी भारत का स्थान नीचले स्तर पर है. भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल, भूटान, श्री लंका और बांग्लादेश से भी पीछे हैं.  रिपोर्ट में 156 देशों में पुरूषों की तुलना में महिलाओं की जरूरतों तक उनकी पहुँच और राजनीतिक सशक्तिकरण जैसे मुख्य संकेतकों व लैंगिक भेदभाव की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का जिक्र किया था.
  गौरतलब है कि वर्ष 2020 में लैंगिक समानता के मामले में भारत 153 देशों की सुची में 112 वें स्थान पर था.2006 में जब पहली बार जारी की गई थी, तब इस सुचकांक में भारत 98 स्थान पर था. 
 लैंगिक असमानता अभी 63 फीसद से ज्यादा है. विडम्बना है कि लैंगिक भेदभाव खत्म करने के लिए  कई प्रकार के स्कीम लागू किये गए परंतु फिर भी हमारे देश में जब लैंगिक असमानता की बात होती है तो मात  खा जाता है. सरकार के द्वारा " बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ " जैसे कई  कार्यक्रम लाये गये. बेटियों को पढाने के लिए फ्री में शिक्षा दी जाती है तथा उन्हें साथ में प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है परन्तु फिर भी हमारे देश में लैंगिक असमानता देखने को मिल जाते हैं. जो हमारे देश और राष्ट्र को पीछे की तरफ खिंचता है. इसके लिए सबसे जरूरी है लोगों को अपनी मानसिकता में बदलाव लाना क्योंकि आज भी हमारा समाज लड़का और लड़कियों में अंतर करता है.

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