दूसरी लहर के असर

देश कोरोना की दूसरी लहर के कारण गंभीर संकट में है. अबादी का हर तबका इस संक्रमण की मार क्षेल रहा है ं . इसका असर अर्थव्यवस्था से लेकर समाज के सभी हिस्सों पर पड़ा है. लोगों के लिए यह स्थिति दयनीय हो गई है. जो लोग सुबह के कमाये पैसे से रात की सब्जी या अपनी परिवार चलाते थे उनकी दशा और ज्यादा नाजुक हो गई है. महामारी के दुष्प्रभावों ने छोटे- बडे़ कारोबार तक की कमर तोड़ कर रख दी है. करोड़ों लोगों की आजीविका पर असर पड़ा है. मध्यम वर्ग की श्रेणी के लोगों पर अधिक प्रभाव पड़ा है. वह बैंक में इक्ट्ठा किये हुए पैसे से अपनी जिंदगी गुजर - बसर कर रहे हैं. कुछ महीने पहले संकेत मिलने लगे थे तथा हालात भी काबू में आ गये थे परंतु अचानक कोरोना की दूसरी लहर ने कईयों को अपनी चपेट में ले लिया. तथा कितनों ने अपने को खो दिया. यह लहर  पहले वाले लहर से भी ज्यादा तेज क्षटका दिया है. यह दिन हजारों की तदाद में लोगों की मौत हो रही है. हां बस आकड़े समाने लाये नहीं जा रहे हैं.
    सबसे ताजुब की बात तो यह है कि सरकार इस बार गुंगी की भांति बर्ताव कर रही है. जहाँ आज जनता लांकडाउन की मांग कर रही है वही सरकार अपनी पुरी जोश चुनाव में लगा दी है. विडम्बना है कि वह हार की मात खाई और शायद देश की अधिकांश जनता इससे खुश भी है.

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