महामारी और किशोर आबादी

कोरोना महामारी में भावनात्मक टूटन सभी के हिस्से आड़े है. कही अपनो को खो देने की पीड़ा तो कहीं अपनों को खोने देने का डर. ऐसे में यह किशोरावस्था के लिए अत्यधिक खातक  है . और उनके लिए उससे बच पाना संभव नहीं है. 
  इससे अवसाद की समस्या दिन - प्रतिदिन और ज्यादा बढ़ रही है. एक और अपने सपने खो चुके किशोर चिंता में है, तो एक और अपने को खो देने से वह असहाय महसूस कर रहे हैं. 
  बीते दिनों मध्यप्रदेश के रायसेन में हुई एक घटना में कोरोना के कारण अपने माँ को खो चुकी किशोर ने चौथे मंजिल से कूद कर जान दे दी थी. वह ऐसे सदमे बरदाश्त ही नहीं कर पा रहे है.
  दरअसल अपनों से बिछड़ने का दर्द अपने ही जान सकते हैं. किशोरों के लिए यह दिन किसी मुश्किल घड़ी से कम नहीं. और सबसे ज्यादा किशोर ही प्रभावित हो रहे है.
  क्योंकि उनके सामने भविष्य और वर्तमान दोनों परिस्थितिया सामने है. उनके पास इतनी समझ है कि वह अपनों को खोने का दर्द समझ रहे है. कितने किशोर तो आत्महत्या करने की कोशिश कर रहे है क्योंकि उन्हें आनाथपन वाली जिंदगी बिताने डर रहें हैं. 
 गौरतलब है इस महामारी ने कितने को आनाथ और बेसहारा कर दिया. कितने ने अपने परिवार को खो दिया. अपनो को खोने की पीड़ा मनोबल ही नहीं तोड़ती वरन् आत्मघाती कदम उठाने को कमजोर कर देती है.
 एक तरफ परीक्षाएं रद्द होने और दूसरा घर तक सिमटी जिंदगी, किशोर की ये बड़ी आबादी मानसिक और भावनात्मक उलक्षनों को क्षेल रही है. हमारे देश में सबसे अधिक आबादी युवा वर्ग की है, करीब 25 करोड़ इनकी जनसंख्या है. जो आज अवसाद तथा एक डर में सिमटी हुई है.
 महामारी के कारण इनके अंदर की एक उत्साह और ऊर्जा छुप सी गई है और वह अपने आप को इन महामारी में सिमट लिए है. 
  ये संक्रमण की दूसरी लहर में पूरे परिवार संक्रमित हो रहें है जिससे बच्चों में अवसाद, चिंता, अनिद्रा, बेचैनी जैसी समस्याएं आ रही है. 
  बहुत परिवार तो ऐसे है जिसमें माता _ पिता दोनों की मौत हो गई है और बच्चे अच्छे परवरिश से वंचित हो रहे है.  "महिला एवं बाल विकास मंत्रालय " ने  स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से कहा है कि अस्पतालों के भर्ती फार्म में बच्चों की समुचित देखभाल सुनिश्चित करने के लिए एक और कांलम जोडा़ जाएं जिसमें माता - पिता गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने वक्त यह बता सकें वे महामारी के शिकार हो गयें तो बच्चे की देखभाल कौन करेगा.
 हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसे बच्चों की सारी खर्चा खुद चलाने को बोला है.
  

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