कालाबाजारी

कालाबाजारी नाम से तो परिचित ही होगें क्योंकि आज कल कोरोना के नाम "कालाबाजारी " जैसी घटनाएं देखने को काफी मिल रही है. चाहे वो इंजेक्शन हो या दवा सब के नाम पर कालाबाजारी हो रही है. पता नहीं लोगों के अंदर भी इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं रह गई है. जहाँ हमें लोगों की साथ देना चाहिए, लोगों की सहायता करनी चाहिए वहां हम पैसे कमाने के पीछे पड़े है . 
  कोरोना जैसी महामारी के नाम पर लोग क्या _ क्या न कर बैठे.  हाल ही कि पारस हास्पिटल पटना की घटना है एक युवती अपने माता को पारस हास्पिटल में भर्ती की . और कुछ दिन बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया. जबकि वह ऐसी नाजुक अवस्था में भी नहीं थी कि वह मर जाये.
  इसकी पीछे की रहस्य यह है कि वह मरी नहीं थी बल्कि वहाँ के स्टाफ के द्वारा रेप की गई उस युवती की. जब स्टाफ और डाक्टर ऐसे करते है तो हम अब इलाज को काहा जाये.
 सवाल यह है कि कुछ भी हो जाये लेकिन ये हवस वाली प्रवृत्ति रूकने वाली नहीं है. रेप जैसी घटनाएं कभी बंद नहीं होने वाली है.
  क्या अभी भी सरकार हाथ पर हाथ धरें बैठी रहेगी. क्या यहाँ भी हम जनता को ही अपनी आवाज उठाने पड़ेगी, न्याय मांगना होगा. 
 ऐसे हम आज भी अपनी आवाज उठाने को तैयार है.

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