एक खत तेरे नाम "दोस्त "

"दोस्ती मतलब जिंदगी " , यूँ कहें तो दोस्तों के बिना दूनिया अधूरी... 
  " एक खत तेरे नाम दोस्त "
    तेरी दोस्ती से बहुत कुछ सीखने को मिल गई.. आज तु पता नहीं दोस्त नहीं लगता अब कोई मेरे परिवार का सदस्य लगता है .. यूँ कहें तो मेरा अपना "भाई " .  
   हाँ हमारे बीच बहुत सारी गलतफहमियां आयी जिसके लिए आज भी मैं खुद को जिम्मेदार समक्षती हु. कोई न  वो शायद गलती से हुआ... 
   अरे ऐसा कुछ मैं लिखने वाली नहीं थी लेकिन जब बात तुम्हारी आती है तो सारे शब्द निकलने लगते हैं.
  हाँ तो बात इस दौर कि है जिस दौर में अभी हम बंद कमरों में बैठे है,, घर में बंद होते हुए भी अपने आप को  सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे है, यहाँ तक तो कोई - कोई घर में रहते हुए भी बोलते है " यार डर लग रहा है, क्या करू सेनेटाइजर का डब्बा पी जायु क्या... जब इन लोगों का ये हाल है जबकि बंद दरवाजे में है.  वही तुम जैसे लोग अपनी जिंदगी के बारे में 1 मिनट सोचे बगैर अपनी जिंदगी गरीबों तथा बेसहारा लोगों के मदद में कुर्बान कर दिये हो और मुझे नहीं लगता तुम उनके अपेक्षा ज्यादा ख्याल भी रखते होगें... हां माना कि इसमें अपने आप को सुरक्षित रखना है लेकिन ऐसे भी नहीं रखना कि उन गरीबों के बारे में बिना सोचे आंख  बंद कर लेना है. 
   हां आप अपने आप को मास्क, ग्लोबस आदि से बचाव कर उन बेसहारा कि जान तो जरूर बचा सकते हैं. वो भी तो किसी माँ, पिता, भाई, बहन होंगे क्या हम उनकी उचरती  दूनिया को नहीं बचा सकते... लेकिन यहाँ लोगों को अपनी पड़ी है... 
            "लेकिन तुम्हें नहीं "
 तुम्हारे इस रोज की मेहनत को देख कर यही लगता है तुम्हारे जैसे भी इंसान है लेकिन ऐसे लोगों की जनसंख्या कम है. काफी खूशी भी होती है तुम जैसे लोग मेरे जिंदगी के हिस्सा हो.. जैसे नहीं  "तुम ". वास्तव में तुम्हारे हर रोज की ऐसे परिश्रम को देख कर एक अजीब सी सुकून मिलती है. क्योंकि तुम बहुत किसी के चेहरे की मुस्कान बने होगें, और बन रहे हो.  Really I Proud of you dost ( bhai ❤) 

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