आग की लपटों से निकलते सवाल
कोरोना काल हो या समान्य वक्त, अस्पताल हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं. पिछले एक साल से कोरोना जनित आपदा ने अस्पताल तथा स्वास्थ्य सेवाओं की तरफ ध्यान आकर्षित कर दिया है. एक कोरोना के दृश्य हमें भयभित कर दिया है तो वही दूसरी ओर अस्पताल भी अपनी पांव पसार रही है.
संक्रमितो की इस बढ़ती जनसंख्या में अस्पताल अपनी क्षमता से ज्यादा काम तथा सेवा कर रहा है. जहाँ संक्रमितो की संख्या 4 लाख पार है ऐसे में आग की खबरें सुनने को मिल रहे है. गुजरात के भरूच शहर में आग लगने से 18 मौत हो गई थी वही सुरत में पिछले महीने आयुष अस्पताल के आईसीयू वार्ड में आग लगने से 4 कोविड मरीज मर गये है. हाल में ही अब आग लगने से कोविड मरीज के मरने की खबरें मिल रही है.
अचानक बिजली पर मिले बोक्ष से आग लगने की खबर आ रही है. अस्पतालों में केंद्रीकृत वतानुकूलन संयंत्र, आक्सीजन संयंत्र सहित दूसरे कामों में बड़े पैमाने पर बिजली की खपत बढ़ गई है. ऐसे में तारों पर भार बढ़ता है, वे ज्यादा गरम हो जाते हैं और इसी से चिंगारी पैदा होती है यही आग लगने का बड़ा कारण बनती है.
हालात की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को राज्य सरकारों को निर्देश देना पडा़ है कि कोविड अस्पतालों में आग की घटनाएं रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाए.
अस्पतालों में बिना समय गंवाएं आग बुझाने के लिए पर्याप्त अग्निशमन यंत्रों जैसे फायर बांल, आक्सीजन, फायर हाइडेट, फायर अलार्म, दमकल, जल की उपलब्धता व आपूर्ति की व्यवस्था को समय रहते दुरूस्त करना चाहिए.
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