संक्रमण का दायरा

संक्रमण जिस तरह से अपने पैर फैला रहें उसे रोकना बहुत मुश्किल हो गया. अब तो स्वास्थ्यकर्मी भी  चपेट में आ रहे हैं. आपको बता दे कि राजधानी दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में 37 चिकित्सक संक्रमित पाये गये हैं. जो हमारे लिए एक विकट समस्या है. दिल्ली के अखिल भारतीय आयुविज्ञान संस्थान में भी करीब 50 स्वास्थ्यकर्मी के संक्रमित होने की खबर आयी है. 
  गौरतलब है कि जब असली योध्दा भी संक्रमण का शिकार हो जायेंगे तो हम जैसे आम नागरिक कैसे इस जंग का सामना कर पायेंगे. जो यह एक गंभीरनीय प्रश्न है हमारे लिए. 
 केजीएमयू और दिल्ली में जिन चिकित्सकों में संक्रमण मिला है उनमें से अधिकांश ने टीके की दोनों खुराक ले ली थी. ऐसे में सवाल " टीके " पर उठता है. क्या हमारा टीका कोई काम का नहीं? क्या नरेंद्र मोदी हमें संत्वाना देने के लिए दिग्भ्रमित तो नहीं कर रहे.
 इस वक्त देश के अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इतनी वृद्धि हो रही है कि एक बेड पर तीन लोगों का इलाज हो रहा है. तथा हर दिन सवा लाख से अधिक मरीज भर्ती हो रहें हैं. खासतौर पर जिन अस्पतालों को पूरी तरह से कोंविड केंद्र में तब्दील कर दिया गया है  वहाँ की स्थिति और अधिक भयावह है. 
  पिछले साल की स्थिति स्वास्थयकर्मियों के लिए नया था. अब तो एक साल हो गयें  तथा लोगों को इस संक्रमण से निपटने के कुछ उपाय भी पता चल गया तथा वैक्सीन भी आ गयें फिर भी इसके रफ्तार में कोई कमी नहीं है. अस्पतालों में मरीजों को संक्रमण से बचाने का जो मानक घेरा है वह कमजोर है. टीकाकरण भी शुरू के अपेक्षा काम करना धीरे कर दिया है. अभी भी कोई पक्का नहीं है कि टिकाकरण इस विकट संक्रमण का पुख्ता इलाज है.यह भी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि दो खुराक लेने के बाद संक्रमण नहीं होगा. क्योंकि दो खुराक लेने वाले की भी मृत्यु हो जा रही है.
   यह तय है टीका जोखिम से बचाएगा.

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