महिला सशक्तिकरण

प्रत्येक साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता हैं! साल 1908 में इस दिन को पहली बार मनाया गया था! इस समय अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का थीम, अतीत का जश्न, भविष्य की योजना था! 2021 में इसका थीम इंटरनेशनल विमेंस डे डांट कांम के मुताबिक ' choose to challenge' है! 
  प्रश्न यह है कि महिला सशक्तिकरण क्युं मनाया जाता है? 
  महिला सशक्तिकरण मनाने का एक मात्र कारण है कि महिलाओं को मजबूत बनाना, ताकि वह अपने जिंदगी से जुड़े हर फैसले ले सकें! लेकिन जो समाज इस दिन को इतने धूमधाम से मनाता है वही समाज लड़कियों को आगे बढने में बाधा उत्पन्न करता हैं! जी हाँ, यह सुन कर थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा परंतु हमारे समाज की यही सच्चाई है! 
 आइये अब गौर फरमाते है, 'आखिर कैसे'? 
अभी भी हमारे समाज में  रूढ़िवादी धारणा कायम है! हाँ, ये भी सच है  हमारे समाज की लड़कियां आज हवाई- जहाज चला रही है, अमेरिका जैसे  शक्तिशाली देश की उपराष्ट्रपति बनी हैं, हर क्षेत्र में लड़किया अपना परचम फहरा रही है, लेकिन उसके लिए उन्हें तमाम जद्दोजहद करना  पड़ता है! हम तो बस अखबार और न्यूज सुन कर उसकी वीरगाथा गाते है परन्तु उसके छिपे उस दर्द और कठिनाई को नहीं देखते जिससे वह बाहर निकल कर आई है ं ! और उस पर हम अपना समय देना भी समय बर्बाद ही समक्षते है!   
    विडम्बना है कि इस 21 वीं शताब्दी में भी महिलाओं को कुछ लोग वंश चलाने के रूप में देखते हैं! वह महिला से विवाह कर पहले तो वह दहेज रूपी जैसी समस्या को लेकर प्रताड़ित करते है, और वही जब उनका वंश इस दुनिया में आ जाता है तो वह उन्हें मार देते, जला देते हैं! 
आखिर हमारा समाज कब इन सब चीजों से बाहर निकलेगा?, कब वह महिलाओं को प्रताड़ित करना छोडेगा, कब वह महिलाओं कठपुतली नहीं समझेगा? 
    आखिर कब?? 
    गौरतलब है कि, हमारे देश के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री द्वारा हमे हमेशा आगे बढने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है! हमारे सरकार द्वारा 'जन  धन योजना ', बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे तमाम क्रायक्रमों को चलाकर हमे यहाँ तक लाया जाता है, जहाँ हम अपने पैरों पर खड़े हो रहें हैं, अपने फैंसले लेना शुरू कर रहे हैं! लड़कों और लड़कियों में भिन्नता करने वाले लोगों की मानसिकता में थोड़ा बदलाव आया है! 
   सबसे अहम बात, हमारे समाज, राज्य में यूँ कह ले तो पूरे देश में दशहरा इतने धूमधाम से मनाया जाता है,  नैंवे दिन कुंवारी कन्या की पूजा की जाती है और वही  10 वें दिन से फिर से वही बालात्कार जैसे केस सुनते और देखने को मिलतें है, ये 9 दिन का ढोंग किस लिए जब फिर से आपको उस दसवें दिन महिलाओं की इज्जत उतारना है! ऐसी पूजा किस काम कि जब आप दूसरे दिन से यही घिनौने काम करना है! ये ढोंग क्यूँ? 
हमें ये  महिला  दिवस की दिखावे नहीं चाहिए, बस हमें इन दरिंदों जैसे लोगो से सरकार बचा ले तथा उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दें और ऐसी कानूनी करवाइ करें जिससे दूसरे दिन से ऐसे जघन्य अपराध करने से   लोग सोचें!!!  

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