साइबर स्टांकिग समस्या

    इन्सान अपनी जिंदगी का अधिकांश समय मोबाइल को दे दिया है! यूँ कहें तो लोगों की जिंदगी ही बन चुकी है! अब तो सांस और मोबाइल में अब ज्यादा दूरी का फासला नहीं रहा! 
   भारत में  साइबर स्टांकिग का पहला मामला वर्ष 2001  में दर्ज हुआ था! आकड़े के अनुसार साइबर स्टांकिग की समस्या से पीड़ित बच्चों की संख्या भारत में सर्वाधिक हैं!  लोग मोबाइल का इस्तेमाल अच्छे कामों में न करके गलत कामों में ज्यादा कर रहे हैं! आज - कल लोग अपनी गर्लफ्रेंड के पीछे मोबाइल जैसे ऐप को जासूसी के रूप में लगा दे रहे है! जिसे उन्हें सारी सूचनाएं मिल जा रही है, वह काहाँ जा रही, किससे बात कर रही है जैसी घटनाएं चंद मिनटों में ही मिल जा रहा है! 
  क्या लड़कियों के जीवन में प्राइवीसी नाम का कोई चीज नहीं! क्या  उन्हें उतना भी हक नहीं कि अपनी गुप्त सुचना को अपने पास रखें!  लड़कें सारी सूचना निकाल कर उसे परेशान करना शुरू कर देते है !गौरतलब है कि मोबाइल हमारे  जिंदगी को आसान कर दिया है! घर बैठे - बैठे हम शोपिंग,टिकट जैसे अनेक काम कर लेते हैं, हमें जाने की जरूरत नहीं पड़ती! लेकिन जितनी  सुविधाएं हमें मोबाइल से मिल रही है उतनी ही अधिक  क्राइम में बढ़ोतरी हो रही है! 2020 में कुल 58,870 मोबाइल उपभोक्ता परेशान हुए हैं, जिसका एक मात्र कारण है साइबर स्टांकिग! इस समस्या न केवल भारत के ही लोग जुक्ष रहे हैं वरन् अमेरिका और ब्रिटेन के लोग भी इस समस्या से परेशान है! 

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