एक बयान ऐसा भी # उत्तराखंड सरकार

उत्तराखंड के नये मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत अपने बयान से ट्रोल में है. वह अपने भडकाऊ - भडकाऊ शब्दों से इन दिनों अखबार तथा न्युज के सुखियों में देखने को मिल रहे है.
  आपको बता दे कि आये दिन वह महिलाओं पर तंज कसते नजर आ रहें है. हाल ही में वह महिलाओं के फटी जींस पर सवाल उठा दिये. उनके जुबान फिसलने का सिलसिला जारी है.
 प्रश्न यह है कि क्या फटी जींस पहनने से संस्कार खत्म हो जाते है. क्या संस्कार को ढोने का जिम्मा केवल महिलाओं को है.
  उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को अपने सोच बदलने की बहुत जरूरत है. जिस प्रकार वह महिलाओं के लिए ऐसे शब्द का इस्तेमाल किये है इससे लगते है उनकी सोच काफी  छोटी है. जिसे विकसित करने की बहुत जरूरत है. जींस का फटा होना उस फटी मानसिकता से कही ज्यादा बेहतर है. फटी जींस तो हम पहनते है लेकिन वो फटी मानसिकता कोई काम का नहीं जो समाज को बांटने और बेवजह "जज " करने के.
 अभी आये हुए एक पखवाड़े भी नहीं हुआ कि वह अपने विवादित बयान से पूरे देश में ट्रोल हो रहें है.
  बेहतर तो ये होता ये महोदय महिलाओं के शरीर पर तांक- क्षांक ना करके, बेहताशा बढती मंहगाई, घटते रोजगार, बढ़ती बेरोजगारी, गिरती शिक्षा व्यवस्था, बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं, बढ़ते अपराध पर ध्यान देते और इस प्रकार के तंज कसते. लेकिन इनका नजर महिलाओं से हटे तब तो.
  आये दिन उन्होंने जनता पर यह भी तंज कसते हुए कहा है "अगर ज्यादा राशन चाहिए तो आपको ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए. आपको बता दे कि नैनीताल के रामनगर में रविवार को वन विभाग के क्रार्यक्रम में अपने भाषण में  यह कह कर चौंका दिया कि अगर ज्यादा राशन चाहे तो आपको ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए. उन्होंने यह शब्द इसलिए बोले क्योंकि कोरोनाकाल में  दो बच्चों पर यानी कम जनसंख्या पर 10 किलोग्राम या कम राशन मिले थे तथा जिनकी जनसभा ज्यादा थी या जिनके 20 बच्चे थे उन्हें 1 किवंटल आनाज मिले थे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है भारत अमेरिका का 200 सालों तक गुलाम रहा  है आज वही , पूरे विश्व में इसका राज था, सुरज कभी डुबता नहीं था आज वही देश डोल गया है. क्या ऐसे शब्द एक मुख्यमंत्री को शोभा देता है? इससे यह लगता है मुख्यमंत्री अपने बयान से अपनी ही सोच को पारदर्शिता कर रहे है.अगर ऐसे शब्द का इस्तेमाल उन्होंने मुख्यमंत्री बनने से पहले प्रयोग किये रहते तो आज उनके लिए मुख्यमंत्री का पदभार संभालना कठिन हो जाता.
  विडम्बना है कि यही मुख्यमंत्री 8 मार्च को एक ट्वीट करते हुए महिलाओं को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी थी. उन्होंने यह ट्वीट करते हुए लिखा था " यत्र नार्यस्तु पूजयंते रमंते तत्र देवता: "!! अर्थात उन्होंने लिखा था धरा और सृष्टि को धन्य करने वाली मां - बहनों और बेटियों को कोटिशः नमन. 
क्या वह अपने किये गए ट्वीट इतनी जल्दी भूल गये कि हम जनता को उनकी ट्वीट को याद कराना पड़ रहा है. क्या ऐसे तंज महिलाओं पर कसते हुए मुख्यमंत्री को अच्छें लगते है. उनके ऐसे शब्द महिलाओं को समाज और घटियापन दिखाना साबित होते हैं.
   गोरतलब है कि ऐसे ही लोगों की सोच तथा ट्वीट में फासले रहते हैं.

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