चुनौतिया बढाता संक्रमण
देश में कोरोना संक्रमण एक बार फिर तेजी से अपने पांव पसार रहे हैं. महाराष्ट्र तथा अन्य शहरों में पूणबंदी तथा कई राज्यों में रात्रि कफ्यु लगाए जा रहे हैं.
इसी बीच कोरोना महामारी से लड़ने के बजाय राजनितियां जारी है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री कोरोना महामारी को अनदेखा कर बड़ी- बड़ी रैलियां तथा रोड शो में व्यस्त है. होना भी जायज है चुनाव जो आने वाले है. ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के नोटिस की अवहेलना कर उन्होंने मिटिंग में आने को जरुरी नहीं समझा . तथा अपनी अनुपस्थिति कायम कर यह बता दि अभी जनता के जिंदगी से ज्यादा जरूरी है उनका चुनावी प्रचार - प्रसार करना है.
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले फिर से लोगों की चिंता को बढा़ दी है. 2 महीने पहले तक नये संक्रमितों में काफी गिरावट आयी थी. रोजाना नये संक्रमितों के मामले कम आने लगे थे परंतु पिछले एक महीने से फिर यह अपनी रफ्तार पकड़ ली है. देश के 10 राज्यों - पंजाब, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और तामिलनाडु में मामलों में तेजी आने के बाद पूरे गार्फ को उलटफेर कर दिया है. कोरोना विषाणु में बदलाव की सबरे ंं ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील हर जगह से आ रही है. लेकिन अभी तक ऐसे कोई सबूत नहीं मिलें हैं जिससे ये पता चले कि कोरोना महामारी भारत में फिर से कहर बरपाएगी.
कोरोना महामारी से बचने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए गए हैं. जिसमें मास्क लगाना, दो गंज दूरी आदि है परन्तु समय के साथ लोग इसमें ठिलन्नता ला रहें हैं. इन सबसे ज्यादा जरूरी है वैक्सीन के प्रति विश्वास तथा व्यापक रूप से पूरे फैलाना.
परन्तु विडम्बना यह है कि हमारी सरकार इस वैक्सीन को भी अपने राजनीति में ना छोडी ़ . विपक्षी दल के नेता वैक्सीन को लेकर गलतफहमी पैदा कर रहे हैं लोगों के अंदर. कोई नेता तो अपने राजनीति के दलदल में इतना गिर गया है कि गलत अफवाहें पैदा कर रहा है. किसी नेता का कहना है कि यह हमारे धर्म को नीचा दिखाया जा रहा है, इसमें गाय का इस्तेमाल किए गए हैं. क्या हमारे देश को यह शोभा दे रहा है कि इस कहर की समस्या जहाँ साथ मिल कर निपटने की जरूरत है वही वो आज "वैक्सीन " जैसे शब्द पर अपने सारे राजनीति को ही रख दिये है.
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