जल_ प्रदूषण
जीवन के लिए वायु के बाद जल ही सबसे जरूरी तत्व है! बचपन से ही हम अपने किताबों में " जल ही जीवन है " पढते आये है! परन्तु बस हम इसे पढ़ कर दो, चार वाक्य लिखते आये है! परन्तु कभी इसके बारे में कभी मंथन नहीं किया और ना करने की कोशिश भी की!
सही मायने में प्रदूषण की वजह हम मनुष्य है! हम अपने सुख _ सुविधाओं के उपभोग में इतने व्यस्त है कि प्रदूषण पर अपनि ध्यान केंद्रित करना जरूरी नहीं समक्षते असल में हम इसे समय की बर्बादी समक्षते है! हम थोड़ा दूर जाने के लिए अपने वाहन का इस्तेमाल करते है, पैदल चलना हम अपनी शान में कमी समक्षते है! और यही शान हमें कई खतरे में डाल देता है! सुबह हम टहलने के लिए पार्क में जाने के लिए भी अपने वाहन का इस्तेमाल करते है! इसी प्रकार जल - प्रदूषण की वजह हम मनुष्य है! हम कल - कारखाने से निकले मलवे नदियों में प्रवाहित करते है! केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का मानना है कि जल _ प्रदूषण में 75 से 80 फीसद भूमिका घरों से सीवेज के जरिये निकालने वाले मल - मूत्र है! हम प्रवाहित करते वक्त इसके नुकसान के बारे में नहीं सोचते ! परंतु इसका नुकसान हमारे स्वास्थ्य को ही भुगतना पड़ता है! नदियों में गंदे जल प्रवाहित करने से नदियों के आस- पास उगायी गई सबि्जयां भी इन कारण जहरीली हो जाती है! और दिन _ प्रतिदिन हम इस जहर की थोड़ी - थोड़ी डोज के रूप में सेवन कर रहे है! जल - प्रदूषण का दुष्प्रभाव सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर हमला करता है! दूषित जल से कुछ जानलेवा बिमारियाँ जैसे - पीलिया, डायरिया, हेपेटाइटिस आदि का व्यक्ति शिकार हो जाता हैं! विकास कि इस अंधी दौड़ में नदियों को इतनी तेजी से प्रदूषित किया जा रहा है कि अब शहरों को बसाने से ज्यादा नदियों को बचाने की जरूरत पड़ रही है!
कुछ रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया को हर साल करीब 46 खरब डांलर की नुकसान प्रदूषण के कारण होता है! यह वैश्विक अर्थव्यवस्था का 6.2 प्रतिशत है! देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार बढ़ते वायु _ प्रदूषण से सोखने की क्षमता घट रही है! और हाल नदियों का है नदियों के पानी का मीठापन कम हो रहा है!
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