स्त्री की आत्मनिर्भरता और सवाल

आत्मनिर्भरता शब्द ,जिस शब्द से आज बच्चे से लेकर बुढ़े तक परिचित होगें! जी हाँ ये शब्द सुनते ही आपको नरेंद्र मोदी का आत्मनिर्भर वाले शब्द याद आ गयें होंगे! 
  लेकिन यहाँ सवाल आत्मनिर्भर स्त्री की हो रहीं हैं! आत्मनिर्भर का सामान्य अर्थ है, स्वंय पर निर्भर! जो एक स्त्री कभी आत्मनिर्भर नहीं बनती! क्योंकि  उसे समाज वाले बनने ही नहीं देते! हाँ लेकिन वह अपने परिवार में आत्मनिर्भर रहती है और परिवार के अन्य सदस्य एक स्त्री पर ही निर्भर रहते हैं!  एक स्त्री के कंधे पर अपने परिवार के सारे दायित्व रहते हैं! वह जब बड़ी होती हैं जब उसमें समझदारी आती है यूँ कहें तो थोड़ी अक्ल आती हैं, उसके बाद वह परिवार के सारे दायित्वों से परिपूर्ण होती हैं! उनपे एक बहन, एक पत्नी, एक माँ का सारा कर्तव्य आ जाते हैं! वह अपने सारे काम तथा परिवार के सारे दायित्वों को लेकर चलती हैं! वह आत्मनिर्भर होती हैं, परन्तु केवल अपने परिवार के लिए! परंतु जब उन्हें किसी चीज की जरूरत होती हैं, जिसके लिए उन्हें चारदिवारी से बाहर जाने के लिए मना कर दिया जाता हैं! जिस कारण वह किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर हो जाती हैं! यूँ कहें तो इंसान कुछ मामलों में स्वंय पर निर्भर रहता है तो कुछ के लिए दूसरे पर आश्रित रहता है!  अर्थात आत्मनिर्भर और पराश्रितता दोनों शब्द साथ - साथ चलती है! 
     21 वीं शताब्दी में महिलाएं घर कि चारदिवारी से निकल कर अपने अधिकांश काम स्वयं करने लगे हैं! परंतु आये दिन ऐसी - ऐसी घटनाएं घट यहीं हैं जिससे स्त्रियाँ आत्मनिर्भर बनने की कोशिश में ही रह जाती हैं! आये दिन बालात्कार के केस आते हैं, यहाँ तक छोटे बच्चों को भी इसका शिकार बना ले रहें हैं! जिसके कारण अभी भी कितनी लड़कियों को घर से निकलने नहीं दिया जाता हैं! जिसके कारण वह आत्मनिर्भर नहीं बन पाती हैं! इन सबके पीछे जो सबसे बड़ी भूमिका होती हैं वह है समाज वाले की! अगर कोई माता - पिता अपने बच्चें को कहीं दूर प्रदेश में पढ़ने को भेज देते है , कमाने को भेजते हैं और  उनके साथ कुछ गलत हो जाता है, तो सबसे पहले आपके समाज वाले आप को ताने देना शुरू कर देते हैं! समाज केवल सवाल करता है!  जिस कारण एक स्त्री कभी आत्मनिर्भर नहीं बन पाती हैं क्योंकि उनके एक कदम निकालते ही कई सवालों का बोझ उन पर डाल दिए जाते हैं! विडम्बना यह है कि हमारा समाज  केवल ऊंगली ही उठाता है, ! इस तमाम जद्दोजहद में आज भी मात्र 27 फीसद महिला अबादी कामकाजी हैं! 

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