विश्व रेडियो दिवस

 संवाद हमारे देश ,समाज के विकास लिए  उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पेड़ पौधों के लिए खाध और पानी! संवाद के बिना हम व्यक्ति, समाज और देश की कल्पना भी नहीं कर सकते! संवाद का दूसरा नाम है रेडियो! 
     रेडियो दिवस हर वर्ष 13 फरवरी को मनाया जाता है! यह पहला संचार माध्यम है जिसके द्वारा हम देश- विदेश की घटनाओं से परिचित हो पाते हैं!  रेडियो हमेशा अपनी सूचनाओं से देश- दूनिया को जोड़ा है! रेडियो 1980-1990 के बीच तंरगों से चलने वाला यंत्र है! रेडियो कभी भेदभाव नहीं करता वह अमीरी- गरीबी, शिक्षित - अशिक्षित में कोई फर्क नहीं करता! वह जिससे जुडता है उसी का हो जाता है! यह हर उम्र के लोगों का सच्चा दोस्त बन जाता हैं! इसकी सूई आपकी मर्जी से चलती हैं! यह खेत- खलिहान से लेकर रसोईघर तक आपका सच्चा साथी बना रहता हैं! 
  आज दूनिया सोशलमीडिया के पीछे दौड़ रहीं हैं! दिन की शुरुआत भी सोशलमीडिया से शुरू हो रही और सोशलमीडिया पर खत्म! जिंदगी की रफ़्तार सड़कों पर देखने को मिल रही हैं! यूँ कहें तो रफ्तार का दूसरा नाम सड़क है! 
     इतने सारे नये- नये संसाधन आने के बावजूद भी  रेडियो एक सच्चे और अच्छे दोस्त की तरह साथ रहने और पंरपरा निभाने का काम कर रहा है! रेडियो से निकली लब्ज़ में  लोग अपने आप को घोल लेते हैं! वह उसी में खो जाते है! 
   रेडियो का अविष्कार 1895 में इटली के जाने माने भौतिक शास्त्री   गुगलेम्मो मारकोनी ने इसी वर्ष दिसंबर में किया! रेडियो के सफर को 100 साल हो गयें! 13 फरवरी को ही संयुक्त राष्ट्र  की रेडियो यूएन ओ की वर्षगांठ भी होती हैं क्योंकि 1946 को उसीदिन रेडियो स्थापित हुआ! पहली बार 13 फरवरी 2012 को रेडियो दिवस मनाया गया! 

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