पंडित दीनदयाल उपाध्याय

भारतीय जनसंघ के नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर, 1916 को मथुरा जिले में जन्म हुआ! उनका पूरा जीवन सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण हैं! 1924 - 1935 के दौरान उन्होंने कई लोगों को खो दिया! उनका जीवन अंधकारमय हो गया था! उन्होंने हाई स्कूल की शिक्षा वर्तमान राजस्थान के सीकर से की! उन्होंने अपना सर्वस्व जीवन राष्ट्र निर्माण में लगा दिया! तथा 1937 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सम्मिलित हो गए! पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने आर एस एस के  माध्यम से देश सेवा को जीवन का लक्ष्य बना लिया! दीनदयाल उपाध्याय का जीवन दो भागों में समर्पित है ! 1. एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 2. जनसंघ 
 1952 में उन्हें जनसंघ का महामंत्री घोषित किया गया! उनके विचार धारा का मुख्य पहलू था उनका दिया एकत्मक मानववाद ! जिस समय पूरा देश विदेश साम्यवाद के अच्छाई और बुराई में उलझा हुआ था उसी वक्त पंडित दीनदयाल उपाध्याय इन दोनों विचार धाराओं को नकारते हुए एकात्म मनोवाद की अवधारणा दी! एकात्मक मानवाद भारतीय संस्कृति, विचार और दर्शन के बीच से ही उपजा! उनका मानना था कि सामान का आधार संघर्ष नहीं सहयोग है! वे सामाज में अपने विचार को कई तरह से रखा  ! उन्होंने हर भूमिका में सामाज में एक नई दिशा देने की कोशिश की! पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण है! उन्होंने उस दौर में पत्रकारिता को अपनाया जब पत्रकारिता मिशन हुआ करती  थी!  
  11 फरवरी 1968 को उनकी आकास्मिक मौत हो  गई! 

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