कुपोषण पर गहराता संकट
दुनिया में जहाँ एक तरफ हम महामारी से परेशान है वही दूसरी तरफ हम कुपोषण जैसे शब्दों को भी नजर -अंदाज नहीं कर सकते! भले ही महामारी ने अपना योगदान न दिया हो लेकिन आग में घी डालने का काम जरूर किया है! अभी हम इस संकट से उबरने की कोशिश कर ही रहे थे कि इस महामारी ने इस दलदल में और धक्का दे दिया! जिससे हमें इससे निजात पाने में फिर से एकबार शुरू से कोशिश करना होगा!
नई रिसर्च के मुताबिक यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में कोई बच्चा भुखमरी से मरेगा तो कोई मोटापे की वजह से! और इसकी प्रमाणिकता हम अपने अगल - बगल देखते हैं! कोई बच्चा इतना खा लेता है कि वो कई प्रकार की बिमारियों से ग्रसित हो जाता है वही दूसरी और किसी बच्चों को दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो पाती और वो कुपोषण से ग्रसित हो जाते हैं! यह शहरों के अपेक्षा गा्मिण क्षेत्रों में कुपोषित बच्चे ज्यादा दिखने को मिलतें है!
भारत सरकार ने इस समस्या से निजात पाने के लिए कई प्रकार के योजनाएँ बनाये हैं परंतु उन पर भी संकट मडराते दिखते है ! कई स्कूलों में महीने हो जाते हैं खाना खिलाये हुए बस दिवार पर बडे - बडे मेन्यू लगा दिये जाते हो जैसे मानो लगता है कि यह शोभा के प्रतीक हो! बच्चे अपने हक से भी वंचित रह जाते हैं! वह अपने हक का भी लाभ नहीं उठाते हैं!
ऐसे तो बच्चों को भारत का भविष्य कहा जाता है और उन्हीं भविष्य को भरपेट दो वक्त का खाना नहीं मिल पाता है! जाहिर है, कुपोषण के शिकार होते हुए भारत का भविष्य होना कठिन है!
संयुक्त राष्ट्र संघ ने बहुत पहले ही अपने देशों से 2030 तक अपने- अपने देशों से भूखमरी खत्म करने का ऐलान किया है! संयुक्त राष्ट्र ने सभी देशों से भी साफ- साफ कह चुका है, अपने बच्चों के पोषण पर पयाप्त खर्च करें! इस वैश्विक अभियान के लिए यह संस्था समय-समय पर अवगत कराते रहती है उन्हें कार्य कर्मों के द्वारा लेकिन जब भूखमरी के खात्मे का समय नजदीक आ गया, सिर्फ 10 साल रह गया तो संयुक्त राष्ट्र की चिंता स्वाभाविक है! एक तो पहले कई देश इस लक्ष्य के मुताबिक ढीलेपन कर रहे थे इसी में यह महामारी ने जोरदार धक्का दे दिया!
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