इस आनंदोलन का यह हश्र तय था

26 जनवरी को हुए यह विरोध प्रदर्शन तय था! हर भारतीय जनता के मन ही मन यह आशंका बनी हुई  थी! 2 महीनों से जारी इस विरोध प्रदशन का गुस्सा निकालने का किसानों के पास इससे अच्छा सुनहरा मौका नहीं था! लेकिन किसान अपने इस बदले की आग को इस प्रकार प्रदर्शित करेंगे, किसी एक भारतीय ने नहीं सोचा होगा! 
    किसानों को अपने टैरक्टर रैली निकालने के लिए पहले से उन्हें रास्ते तय कर दिये थे, सरकार के द्वारा! दिल्ली पुलिस ने भी यह मान लिया था, किसानों के रूप में यह  एकत्रित भीड़ अपने नेताओं का अपने प्रशासन का बात जरूर मानेंगे! हमें भी यह उम्मीद थी, किसान मित्र ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे हमारे सर क्षुक जाऐंगे, हम लज्जा से भलीभूत हो जायेगे, जिस दिन हमें गर्वान्वित  होना चाहिए उसी दिन हम शर्मिंदगी महसूस करेंगे! यह भी सही है भीड़ के लोग कभी किसी नियम या वायदे को नहीं मानती फिर हमारे ये किसान मित्र कैसे मान लेगें! 
    भारत के गणतंत्र दिवस के परेड न केवल हमारे सीने चौड़े करते हैं वरन हमारे सर गर्व से ऊचे कर देते हैं! परन्तु ये बेशमी वाले टैरक्टर रैली ने अन्य देशों के सामने भी हमें पानी- पानी कर दिया! जहाँ एक परेड हमें उस दिन गर्वान्वित महसूस करवाते हैं वही दूसरी परेड हमारे सर नीचे कर देते हैं! 
    जिस दिन हम अपने मोबाइल, टेलीविजन खोल  परेड देखने का इन्तजार कर रहे थे, हम अपने बच्चों  को इस करोना महामारी में स्कूल न भेज टेलीविजन खोल परेड दिखाने को सोचा था, हमें क्या पता कि इस साल कोई और परेड देखने को मिलेगा! हमारी भारत- माता का सर क्षुका  दिये! 
    लेकिन हमारे मन ही मन एक आशंका हमे खाये जा रही है क्या सच में हमारे मूल्क के ही किसान थे,? क्या वो ऐसा काम करेगें जिससे हमारे और हमारी भारत- माता का सर श्रम से क्षुक जाये, क्योंकि हमें अपने किसान भाइयों पर भरोसा है कि वो ऐसा काम नहीं करेंगे!  किसानों के वेश में कोई और अजनबी या दूसरे मूल्क के होगे जो हमे उस दिन शमिदीगी महसूस करवा गयें! 
   यह आनंदोलन हमारे दूश्मन देशों के लिए कोई अच्छी खबर से कम नहीं है! वे और इसे मनोरंजन से कम नहीं समझ रहे होंगे! कुछ दिन पहले अमेरिका में हुए हंगामा को लेकर  हम भारतीयों ने अपने- अपने अलग अलग विचारधराए प्रस्तुत किये थे! हमें क्या पता कि एक दिन हमारे ही देश के गद्दार लोग हमारी बदनामी करवायेगे! और हमारे पावन वर्ष के दिन हमारी नजरे क्षुका देगें और हमें अपने नजरों तथा अन्य देशों के नजरों में हम क्षुक जाऐगे! 
   अब ये खबर हर पीढ़ी दर पीढ़ी हमे लज्जित महसूस करवायेगी तथा अब हर वर्ष इस खबर को 26 जनवरी के दिन एक क्षलक हमे जरूर दिखाया जाऐगा! 

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